ओवरथिंकिंग करने का मतलब है किसी भी बात को बार-बार सोचना, और कई बार उसमें उलझ जाना। यह एक आम समस्या है, जो बहुत से लोगों को होती है। लेकिन अगर ओवरथिंकिंग की आदत पड़ जाए, तो यह आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है।
ओवरथिंकिंग के नुकसान
1.. मानसिक स्वास्थ्य: ओवरथिंकिंग से चिंता, तनाव, और डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याएं हो सकती हैं।
2. शारीरिक स्वास्थ्य: ओवरथिंकिंग से अनिद्रा(Sleeplessness), उच्च रक्तचाप(High B.P.), और हृदय रोग जैसी शारीरिक समस्याएं भी हो सकती हैं।
3. जीवन की गुणवत्ता: ओवरथिंकिंग से आपका जीवन आनंदमय नहीं रह पाता है (Loss of exitement)। आप हर समय चिंतित और तनावग्रस्त रहते हैं।
“अधिक सोचना कभी भी आपको किसी भी चीज़ का जवाब नहीं देगा। इसलिए, अपने विचारों को जाने दें और अपने जीवन का आनंद लें।”
ओवरथिंकिंग से बचने के उपाय
1.. अपने ट्रिगर्स को पहचानें (triggers): सबसे पहले यह पता लगाएं कि क्या चीजें आपको ओवरथिंकिंग की ओर ले जाती हैं। एक बार जब आप अपने ट्रिगर्स को पहचान लेंगे, तो आप उनसे बचने की कोशिश कर सकते हैं।
2. माइंडफुलनेस का अभ्यास करें: (Mindfulness) माइंडफुलनेस का मतलब है कि वर्तमान क्षण में जीना और अपने विचारों और भावनाओं को बिना किसी निर्णय के स्वीकार करना। माइंडफुलनेस का अभ्यास करने के लिए आप ध्यान या योग कर सकते हैं।
3. अपने विचारों को चुनौती दें: जब आप ओवरथिंकिंग कर रहे हों, तो अपने विचारों को चुनौती देने की कोशिश करें। अपने आप से पूछें कि क्या आपका दिमाग आपको सबसे बुरी स्थिति के बारे में सोचने के लिए मजबूर कर रहा है। क्या आपके विचारों में कोई तर्क है?
4. अपने आप को व्यस्त रखें: जब आप व्यस्त रहते हैं, तो आपके पास ओवरथिंकिंग के लिए समय नहीं होता है। ऐसी गतिविधियां करें जिनका आप आनंद लेते हैं और जो आपको सकारात्मक महसूस कराती हैं।
5. डॉक्टर की मदद लें: अगर आपको खुद से ओवरथिंकिंग को नियंत्रित करने में कठिनाई हो रही है, तो किसी मनोवैज्ञानिक से मदद लें। वे आपको ओवरथिंकिंग को दूर करने के लिए रणनीतियां सिखा सकते हैं। (control it)
“अतीत के बारे में सोचना और भविष्य के बारे में चिंता करना आपको वर्तमान से दूर ले जाता है। इसलिए, बस वर्तमान में जिएं और अपने विचारों को नियंत्रित करें।” – दलाई लामा

ओवरथिंकिंग से बचने के लिए टिप्स
** गहरी साँस लें: जब आप ओवरथिंकिंग कर रहे हों, तो गहरी साँस लेने की कोशिश करें। यह आपके दिमाग को शांत करने और आपको वर्तमान क्षण में वापस लाने में मदद करेगा। (practice deep breathing)
** अपने विचार लिखें: अपने विचारों को लिखने से आपको उन्हें व्यवस्थित करने और समझने में मदद मिल सकती है। आप अपनी चिंताओं को एक कागज़ पर लिख सकते हैं और फिर उसे फाड़ कर फेंक सकते हैं।
** किसी दोस्त या परिवार के सदस्य से बात करें: कभी-कभी किसी से बात करने से ही आपको बेहतर महसूस होता है। किसी दोस्त या परिवार के सदस्य से अपनी चिंताओं और भावनाओं के बारे में बात करें। वे आपको सलाह दे सकते हैं या बस आपकी बात सुन सकते हैं।
ओवरथिंकिंग एक बुरी आदत है, लेकिन इसे दूर किया जा सकता है। ऊपर दिए गए उपायों को अपनाकर आप ओवरथिंकिंग से बच सकते हैं और एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सकते हैं।
क्या ओवरथिंकिंग का कोई अच्छा पक्ष है?
आजकल हम सब अपने जीवन में इतने व्यस्त हो गए हैं कि हमारे मन में हमेशा कुछ ना कुछ चल रहा होता है। सोशल मीडिया, स्मार्टफोन, और इंटरनेट के साथ हमें हमेशा कुछ न कुछ करते रहने की जरूरत लगती है, और हमारे दिमाग में बार-बार एंग्जायटी वाले ख्याल आते हैं। इससे हम अक्सर ओवरथिंकिंग करते हैं, जिससे हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। (F*ck*d up mental health)
ओवरथिंकिंग का मतलब होता है कि हमारे मन को बिना रुके, बिना विचार किए हुए हमेशा कुछ न कुछ सोचते रहना और बिना किसी बात का चिंतन करना। यह बात अच्छी है कि हम कुछ समस्याओं के समाधान निकालने के लिए सोचते हैं, लेकिन जब हम बिना किसी निश्चित उद्देश्य के ही दिनभर चिंतन करते रहते हैं, तो यह हमारे लिए खतरनाक और हानिकारक हो सकता है।
ओवरथिंकिंग का बड़ा ही ज़यादा नकारात्मक प्रभाव हो सकता है:
ओवरथिंकिंग एक ऐसी आदत है जो आपको थका देती है, लेकिन कुछ नहीं बदलती।
>> मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव: अधिक ओवरथिंकिंग करने से हम थक जाते हैं और तनाव में आ सकते हैं। इस से डिप्रेशन हो सकता है और ये अच्छे मानसिक स्वास्थ्य को गलत प्रभावित कर सकता है।
>> समय का व्यर्थन: अधिक चिंतन करने से हम अपने समय का व्यर्थ करते हैं, जिससे हमें अपने लक्ष्यों की प्राप्ति करने में देरी हो जाती है।
>> संबंधों का प्रभाव: ओवरथिंकिंग के कारण हम अपने परिवार और दोस्तों के साथ ज़रूरी समय नहीं बिता पाते, जिससे घरेलु संबंधों पर बुरा असर पड़ सकता है।
>> स्वास्थ्य पर प्रभाव: यह भी हमारे शारीरिक स्वास्थ्य को नुक्सान पहुंचा सकता है, क्योंकि यह
हमारी नींद और आराम को भी प्रभावित कर सकता है।
लेकिन कुछ स्थितियों में, ओवरथिंकिंग का कोई अच्छा पक्ष भी हो सकता है।
1.. समस्याओं का समाधान: कई बार हमें किसी समस्या का समाधान ढूंढने के लिए बड़ा ही अधिक चिंतन करने की आवश्यकता होती है। ओवरथिंकिंग करके हम कुछ समस्याओं का समाधान आसानी से निकाल सकते हैं।
2. सीखना और विकासन: किसी नयी काम को सीखने के लिए ओवरथिंकिंग करना भी अच्छा हो सकता है।
3. स्वयं का समय: कभी-कभी हमें अपनी आत्मा के साथ और अपने आप के साथ अकेले समय बिताने की आवश्यकता होती है, और ओवरथिंकिंग हमें यह समय देने में मदद कर सकता है।
समापन:
इसलिए, हमें समय-समय पर अपने मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करने के लिए ओवरथिंकिंग से बचने का प्रयास करना चाहिए। हमें अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए ठोस कदम बढ़ाने की आवश्यकता है, लेकिन अपने स्वास्थय कि ज़िम्मेदारी खुद कि होती है इसलीए हमें अपने स्वास्थ्य को भी महत्वपूर्ण रूप से देखना चाहिए।
“चिंता एक नाव है जो आपके भविष्य को पार नहीं करेगी, लेकिन आपको वर्तमान में डुबा देगी।” – लेनोर हॉरिस

ज्यादा सोचने की आदत को कैसे कम करें?
ज्यादा सोचना एक बड़ी ही कॉमन समस्या है जो कई लोगों को प्रभावित करती है। यह आदत तनाव, चिंता और नींद जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है। अगर आप ज्यादा सोचने की आदत से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो यहां कुछ उपाय हैं:
1.. अपने विचारों को लिखें: जब भी आप ज्यादा सोचने लगें, तो अपने विचारों को एक कागज पर लिख लें। इससे आपको अपने विचारों को बाहर निकालने और उन्हें बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।
2. अपने डर का सामना करें: जब भी आप किसी चीज से डरते हैं, तो उससे सीधे निपटने की कोशिश करें। भाग जाना कोई समाधान नहीं , इससे आपके डर को कम करने में मदद मिलेगी।
3. अपने विचारों को तर्कसंगत रूप(Logical way) से मूल्यांकन करें: जब भी आप किसी चीज के बारे में चिंता करते हैं, तो अपने विचारों को तर्कसंगत रूप(Logical way) से देखें और तय करें कि क्या वे वास्तव में तर्कसंगत (Logical) हैं या नहीं ।
4. ध्यान और योग करें: ध्यान और योग तनाव और चिंता को कम करने में मदद कर सकते हैं।
5. अच्छी नींद लें: अच्छी नींद आपके मन को शांत करने और ज्यादा सोचने को रोकने में मदद कर सकती है।
6. एक सकारात्मक दृष्टिकोण रखें: सकारात्मक सोच(Positive mindset) आपको नकारात्मक विचारों से दूर रहने में मदद कर सकती है।
7. अपने दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताएं: अपने दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताना आपको तनाव और चिंता से दूर रहने में मदद कर सकता है।
यदि आप ओवरथिंकिंग की आदत से छुटकारा पाने के लिए इन उपायों को आजमाते हैं, तो आप देखेंगे कि आप कम तनावग्रस्त और चिंतित महसूस करते हैं और आपको बेहतर नींद भी आएगी ।
कृपया ध्यान दें कि यह सलाह या मानसिक स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के लिए विशेषज्ञ की परामर्श का विकल्प नहीं है, और यदि आपको ऐसी किसी समस्या का सामना करना पड़े, तो कृपया एक मान्यता प्राप्त चिकित्सक से सलाह लें।
आप जो सोचते हैं, आप बन जाते हैं। इसलिए, अपने विचारों को सावधानी से चुनें।” – महात्मा गांधी
किस तरह का व्यक्ति ओवरथिंक करता है?
किस तरह का व्यक्ति ओवरथिंक करता है?
ओवरथिंकिंग एक आम समस्या है जो कई तरह के लोगों को प्रभावित करती है। कुछ लोगों को दूसरों की तुलना में ज्यादा सोचने की आदत हो सकती है। यहां कुछ लक्षण हैं जो बता सकते हैं कि आप एक ओवरथिंकर हैं : जैसे कि :-
>> आप हर चीज के बारे में बहुत सोचते हैं, यहां तक कि उन चीजों के बारे में भी जो आपके नियंत्रण (control) में नहीं हैं।
>> आप हमेशा भविष्य के बारे में चिंतित रहते हैं और सभी संभावित नकारात्मक परिणामों (possible negative outcomes) के बारे में सोचते हैं।
>> आप अतीत में हुई चीजों के बारे में बार-बार सोचते हैं और उन पर पछताते हैं (regret)।
>> आप छोटी-छोटी बातों पर भी बहुत चिंता करते हैं।
>> आपको निर्णय लेने में मुश्किल होती है क्योंकि आप सभी संभावित परिणामों के बारे में सोचते हैं।
>> आप तनाव और चिंता महसूस करते हैं।
>> आपको नींद की समस्या हो सकती है।
यदि आप इनमें से कुछ लक्षणों का अनुभव करते हैं, तो आप एक ओवरथिंकर हो सकते हैं।
ओवरथिंकिंग एक समस्या हो सकती है क्योंकि यह आपके जीवन की गुणवत्ता को कम कर सकती है। यह तनाव और चिंता का कारण बन सकता है, और यह आपको निर्णय लेने और समस्याओं को हल करने में मुश्किल पैदा कर सकता है।
अतीत को याद मत करो, भविष्य के बारे में मत सोचो, ध्यान से वर्तमान में रहो।” – बुद्ध
यदि आप ओवरथिंकर हैं, तो is आदत को बदलने के लिए कुछ चीजें हैं जो आप कर सकते हैं:
>> अपने विचारों को लिखें: जब भी आप ज्यादा सोचने लगें, तो अपने विचारों को एक कागज पर लिख लें। इससे आपको अपने विचारों को समझने में मदद मिलेगी । (You will think straight)
>> अपने विचारों को तर्कसंगत रूप (Logical way) से मूल्यांकन करें: जब भी आप किसी चीज के बारे में चिंता करते हैं, तो अपने विचारों को तर्कसंगत रूप से देखें और तय करें कि क्या वे वास्तव में तर्कसंगत हैं।
>> ध्यान और योग करें: ध्यान और योग तनाव और चिंता को कम करने में मदद कर सकते हैं।
>> अच्छी नींद लें: अच्छी नींद आपके मन को शांत करने और ज्यादा सोचने को रोकने में मदद कर सकती है।
>> एक सकारात्मक दृष्टिकोण रखें: सकारात्मक सोच आपको नकारात्मक विचारों से दूर रहने में मदद कर सकती है।
>> अपने दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताएं: अपने दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताना आपको तनाव और चिंता से दूर रहने में मदद कर सकता है।
चिंता से कुछ नहीं होता, यह केवल समय को बर्बाद करती है और आपके स्वास्थ्य को खराब करती है।” – डेल कार्नेगी

क्या ओवरथिंकिंग एक जहरीला लक्षण है?
दो दोस्त:
पहला दोस्त: क्या तुमने कभी ओवरथिंकिंग के बारे में सुना है?
दूसरा दोस्त: हाँ, मैंने सुना है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति किसी चीज के बारे में बहुत अधिक सोचता है, यहां तक कि उन चीजों के बारे में भी जो उसके नियंत्रण (control) में नहीं हैं।
पहला दोस्त: मुझे लगता है कि मैं ओवरथिंकर हो सकता हूँ। मैं हर चीज के बारे में बहुत सोचता हूँ, और यह मुझे तनाव और चिंता में डाल देता है।
दूसरा दोस्त: ओवरथिंकिंग एक आम समस्या है, और यह कई तरह से हानिकारक हो सकता है। यह तनाव और चिंता का कारण बन सकता है, नींद की समस्याओं का कारण बन सकता है, और यहां तक कि अवसाद का भी कारण बन सकता है।
पहला दोस्त: तो क्या ओवरथिंकिंग एक जहरीला लक्षण है?
दूसरा दोस्त: मैं नहीं कहूंगा कि यह एक जहरीला लक्षण है, लेकिन यह एक समस्या हो सकती है। अगर आप ओवरथिंकर हैं, तो कुछ चीजें हैं जो आप कर सकते हैं:
अपने विचारों अच्छी तरह समझो
अपने विचारों को तर्कसंगत रूप(Logical way) से मूल्यांकन करें:
रेगुलर तरीके से मैडिटेशन करें .
Apni sehat par dhayaan dein.
एक सकारात्मक दृष्टिकोण रखें: सकारात्मक सोच आपको नकारात्मक विचारों से दूर रहने में मदद कर सकती है।
पहला दोस्त: धन्यवाद तुम्हारी सलाह के लिए। मैं इन उपायों को आजमाने की कोशिश करूँगा।
दूसरा दोस्त: कोई बात नहीं। मैं हमेशा तुम्हारी मदद के लिए तैयार हूँ।
“अधिक सोचना कभी भी किसी समस्या का हल नहीं है। यह केवल आपको और अधिक तनावग्रस्त और चिंतित बनाता है।” – एलेनोर रूजवेल्ट
ओवरथिंकिंग पॉजिटिव क्यों है?
क्या आपने कभी यह सोचा है कि ओवरथिंकिंग, जिसे हम “ज्यादा सोचना” भी कहते हैं, किसी समस्या का हल हो सकता है? हां, आपने सही पढ़ा! अगर सही तरीके से किया जाए, तो ओवरथिंकिंग का एक पॉजिटिव पहलू भी हो सकता है। ओवरथिंकिंग आपको पावरफुल बना सकती है .
आइए जानते हैं कि ओवरथिंकिंग के कुछ पॉजिटिव फायदे क्या हो सकते हैं:
1.. समस्याओं का समाधान:
अक्सर, हम एक समस्या का समाधान ढूंढने के लिए ज्यादा सोचते हैं। ओवरथिंकिंग करके हम अलग-अलग पहलुओं को विचार कर समस्या का हल निकाल सकते हैं। इससे हम नए और साहसी तरीके से समस्याओं का समाधान पा सकते हैं जो हमारे लिए पॉजिटिव अनुभवों का स्रोत बन सकते हैं। (Obsessive thinking)
2. विचारशीलता का विकास:
ओवरथिंकिंग के दौरान हम अपने विचारों को खुद से गहराई से जांचते हैं और अपने विचारों को समझने का मौका प्राप्त करते हैं। यह हमारी विचारशीलता को बढ़ावा देता है और हमें समस्याओं के समाधान के लिए नए और उन्नत दृष्टिकोण प्रदान कर सकता है। (Deep Thinking)
3. आत्म-परिचय का मौका:
जब हम अपने विचारों के साथ एक अधिक गहरा संवाद करते हैं, तो हमें अपने आत्म-परिचय की बेहतर समझ मिलती है। हम अपने मानसिक स्वास्थ्य, खुशियाँ, और चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं और अपने जीवन को सफलता की दिशा में अग्रसर कर सकते हैं। (Towards success)
4. नई विचारधारा का आदान-प्रदान:
कई बार हमारे मन में अनगिनत विचार आते हैं, और यह नए और नवाचारी विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। ओवरथिंकिंग करके हम नई विचारधारा को अपने अंदर पैदा कर सकते हैं, जिससे नए कार्यक्षेत्रों में सफलता प्राप्त की जा सकती है। (new Thinking neurons)
5. समय का उपयोग:
कभी-कभी हमें अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए ज्यादा सोचने की आवश्यकता होती है। ओवरथिंकिंग हमें इन निर्णयों को सोचने का समय देता है और हम ठीक तरीके से सोचकर बेहतर निर्णय ले सकते हैं।
ओवरथिंकिंग तब समस्याग्रस्त हो जाती है जब यह नकारात्मकता और चिंता में बदल जाती है। अगर आप हर समय हर चीज के बारे में सोचते रहते हैं, तो आप तनावग्रस्त और उदास महसूस कर सकते हैं।

तो, ओवरथिंकिंग को सकारात्मक ऊर्जा में कैसे बदलें?
ओवरथिंकिंग यानी जरूरत से ज्यादा सोचना। यह एक ऐसी आदत है जो हर किसी को होती है। लेकिन कुछ लोगों में यह आदत इतनी अधिक हो जाती है कि यह उनके जीवन में तनाव और चिंता का कारण बन जाती है।
अगर आप भी ओवरथिंकर हैं, तो निराश न हों। आप अपनी ओवरथिंकिंग को सकारात्मक ऊर्जा में बदल सकते हैं। बस कुछ सरल चरणों का पालन करें।
1.. अपने विचारों को पहचानें: सबसे पहले, आपको अपने विचारों को पहचानना होगा। क्या आप हमेशा भविष्य के बारे में सोचते हैं? क्या आप हमेशा अतीत (Past) में रहने वाले हैं? क्या आप हमेशा नकारात्मक सोचते हैं? (know your thoughts)
2. अपने विचारों को चुनिंदा रूप से चुनें: एक बार जब आप अपने विचारों को पहचान लेते हैं, तो आपको उनमें से चुनिंदा रूप से चुनना होगा। आपको केवल उन विचारों पर ध्यान देना चाहिए कि कोनसे हैं जो आपको खुश करते हैं और आपको आगे बढ़ने में मदद करते हैं।
3. अपने विचारों को चुनौती दें: अगर आपके पास कोई नकारात्मक विचार है, तो उसे चुनौती दें। क्या यह विचार वास्तव में सही है? क्या यह विचार वास्तव में आपके नियंत्रण में है? (Choose wisely)
4. अपने विचारों को जाने दें: (Let go) जब आप अपने विचारों को चुनिंदा रूप से चुनते हैं और उन्हें चुनौती देते हैं, तो आप उन्हें जाने देना सीख सकते हैं। आपको यह नहीं सोचना चाहिए कि आपके पास हमेशा सभी उत्तर हैं।
5. अपने आप को प्यार करें: (Love yourself) अगर आप अपने बारे में सकारात्मक सोचते हैं, तो आप कम ओवरथिंक करेंगे। अपने आप को प्यार करें और अपने आप को सकारात्मक बातें कहें।
6. खुद को व्यस्त रखें: (keep busy)अगर आप अपने दिमाग को व्यस्त रखते हैं, तो आप कम ओवरथिंक करेंगे। कुछ ऐसा करें जो आपको आनंद दे, जैसे कि पढ़ना, लिखना, या संगीत सुनना।
7. मदद लें: (seek help) अगर आप ओवरथिंकिंग से पीड़ित हैं और इसे खुद से हल नहीं कर पा रहे हैं, तो शर्माना मत और किसी कि मदद लें। एक थेरेपिस्ट या काउंसलर से बात करें और वे आपको ओवरथिंकिंग को कम करने में मदद कर सकते हैं।
Conclusion:
ओवरथिंकिंग को सकारात्मक ऊर्जा में बदलना एक चुनौती हो सकती है, लेकिन यह संभव है। बस ऊपर बताई हुई कुछ ज़रूरी बातों का ख़याल रखना होगा.
समापन:
इसलिए, ओवरथिंकिंग को सिर्फ नकारात्मक दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए। हमें यह समझना चाहिए कि जब हम ठीक तरीके से और सकारात्मक तरीके से ओवरथिंकिंग करते हैं, तो हमें अपने जीवन कि ज़रूरी बातों का समाधान निकालने में मदद मिल सकती है।
हमें यह याद रखना चाहिए कि सब कुछ मानसिक स्वास्थ्य और सही दिशा में किया जाने पर ही पॉजिटिव रूप से काम करता है।
कृपया ध्यान दें कि यह सलाह या मानसिक स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के लिए विशेषज्ञ की परामर्श का विकल्प नहीं है, और यदि आपको ऐसी किसी समस्या का सामना करना पड़े, तो कृपया एक मान्यता प्राप्त चिकित्सक से सलाह लें।
“अतीत के बारे में सोचना और भविष्य के बारे में चिंता करना आपको वर्तमान से दूर ले जाता है। इसलिए, बस वर्तमान में जिएं और अपने विचारों को नियंत्रित करें।” – दलाई लामा
Story
साधु और उसका शिष्य : अधिक सोचना बुरा क्यों है और इस आदत को कैसे कम करें
एक बार की बात है, एक प्रसिद्ध साधु अपने शिष्य के साथ एक गाँव में घूम रहे थे। शिष्य बहुत ही बुद्धिमान और जिज्ञासु था। वह हमेशा अपने गुरु से सवाल पूछता रहता था।
एक दिन, शिष्य ने अपने गुरु से पूछा, “गुरुजी, मैं यह नहीं समझता पता हूँ कि अधिक सोचना बुरा क्यों है। ऐसा तो लगता है कि अधिक सोचने से हमें चीजों के बारे में बेहतर समझ मिलती है और हम बेहतर निर्णय ले पाते हैं।”
गुरुजी ने कहा, “तुम सही हो, अधिक सोचने से हमें चीजों के बारे में बेहतर समझ मिलती है। लेकिन अगर हम हर समय हर चीज के बारे में सोचते रहते हैं, तो हम तनावग्रस्त और उदास हो सकते हैं। हम चीजों को तर्कसंगत (Logical) रूप से सोचना बंद कर देते हैं और नकारात्मक विचारों के जाल में फंस जाते हैं।”
गुरुजी ने अपने शिष्य को एक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “कल्पना करो कि तुम एक नदी के किनारे बैठे हो। तुम नदी के बहाव को देख रहे हो। अगर तुम बस बैठो और नदी के बहाव को देखो, तो तुम आनंद और शांति का अनुभव करोगे। लेकिन अगर तुम हर समय यह सोचते रहो कि नदी कहाँ जा रही है, तो तुम तनावग्रस्त और चिंतित हो जाओगे।”
शिष्य ने कहा, “मैं समझ गया, गुरुजी। अब मैं समझता हूँ कि अधिक सोचना बुरा क्यों है।”
गुरुजी ने कहा, “अब मैं तुम्हें दिखाता हूँ कि इस आदत को कैसे कम किया जाए।”
गुरुजी और शिष्य आगे बढ़े और एक खेत में पहुँचे। वहाँ एक किसान खेत में काम कर रहा था।
गुरुजी ने अपने शिष्य से कहा, “देखो, इस किसान को देखो। वह बहुत मेहनती है। वह दिन भर खेत में काम करता है। लेकिन वह कभी भी ज्यादा नहीं सोचता। वह बस अपने काम में ध्यान केंद्रित करता है।”
शिष्य ने कहा, “हाँ, गुरुजी। आप सही हैं। किसान बहुत मेहनती है। वह कभी भी ज्यादा नहीं सोचता।”
गुरुजी ने कहा, “अब तुम समझ गए कि इस आदत को कैसे कम किया जाए। बस अपने काम में ध्यान केंद्रित करो और ज्यादा मत सोचो।”
शिष्य ने कहा, “मैं zaroor कोशिश करूँगा, गुरुजी।”
गुरुजी और शिष्य आगे बढ़े और जंगल में पहुँचे। वहाँ एक भिक्षु ध्यान कर रहा था।
गुरुजी ने अपने शिष्य से कहा, “देखो, इस भिक्षु को देखो। वह ध्यान कर रहा है। ध्यान हमें अपने विचारों को शांत करने और वर्तमान में रहने में मदद करता है।”
शिष्य ने कहा, “हाँ, गुरुजी। आप सही हैं। ध्यान हमें अपने विचारों को शांत करने और वर्तमान में रहने में मदद करता है।”
गुरुजी ने कहा, “अब तुम समझ गए कि इस आदत को कैसे कम किया जाए। ध्यान करो और अपने विचारों को शांत करो।”
शिष्य ने कहा, “मैं कोशिश करूँगा, गुरुजी।”
शिष्य ने गुरुजी की बात मानी और ध्यान करना शुरू किया। वह अपने विचारों को शांत करने की कोशिश करता था और वर्तमान में रहने की कोशिश करता था। धीरे-धीरे, वह अपने विचारों को नियंत्रित करना सीख गया और अधिक सोचने की आदत को कम कर लिया।
शिष्य बहुत खुश था। वह अपने गुरु को धन्यवाद दिया और कहा कि वह अब अधिक नहीं सोचेगा।
गुरुजी ने कहा, “तुम बहुत बुद्धिमान और जिज्ञासु हो। तुमने बहुत अच्छी तरह समझा। अब तुम अपने जीवन में खुश और सफल रहोगे।”
“सोच के परिणाम से ज्यादा, क्रियाओं के परिणाम पर ध्यान दें।” – स्वामी विवेकानंद
