हम सभी कभी-कभी ज्यादा सोचते हैं। यह सामान्य है (its normal)। लेकिन जब ज्यादा सोचना एक आदत बन जाती है, तो यह हमारी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है। (Danger to mental health)| ज्यादा सोचने से कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं, जिनमें शामिल हैं:
1* चिंता विकार: चिंता विकार एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है जिसमें व्यक्ति अत्यधिक और लगातार चिंता करता है। इससे भय, घबराहट, बेचैनी, नींद की समस्या और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
2* डिप्रेशन: डिप्रेशन एक और मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है जो ज्यादा सोचने से हो सकती है। यह उदासी, निराशा, रुचि की कमी, ऊर्जा की कमी, नींद की समस्या और भूख में बदलाव जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।
“सही सोचने का मतलब यह नहीं है कि आप हमेशा सही होंगे, लेकिन इसका मतलब है कि आप सही रास्ते पर होंगे।”
3* अनिद्रा: अनिद्रा एक नींद विकार है जिसमें व्यक्ति को सोने में कठिनाई होती है या अच्छी नींद नहीं आती है। यह ज्यादा सोचने से होने वाले सबसे आम लक्षणों में से एक है।
4* अत्यधिक थकान: ज्यादा सोचने से अत्यधिक थकान भी हो सकती है। यह इसलिए है क्योंकि ज्यादा सोचने से हमारे दिमाग को बहुत मेहनत करनी पड़ती है।
5* सिरदर्द: ज्यादा सोचने से सिरदर्द भी हो सकता है। यह इसलिए है क्योंकि ज्यादा सोचने से हमारे दिमाग में तनाव बढ़ जाता है।
“सकारात्मक सोच आपको उन चीजों को देखने में मदद करती है जो ठीक हैं, न कि उन चीजों को जो गलत हैं।”

जानलेवा लक्षण:
अधिक सोचने के कुछ जानलेवा लक्षण भी हैं, जिनमें शामिल हैं:
** आत्महत्या के विचार (Suicidal thoughts): यदि आप ज्यादा सोचते हैं और आपके मन में आत्महत्या के विचार आते हैं, तो यह एक गंभीर समस्या है और आपको तुरंत मदद लेनी चाहिए।
** दिल की समस्याएं (Heart Problems): ज्यादा सोचने से दिल की समस्याएं भी हो सकती हैं, जैसे कि उच्च रक्तचाप और हृदय रोग।
** प्रतिरक्षा प्रणाली में कमजोरी (Weak Immune system): ज्यादा सोचने से प्रतिरक्षा प्रणाली में भी कमजोरी आ सकती है, जिससे आप अधिक बीमार पड़ सकते हैं।
“अगर आप अपनी सोच बदल सकते हैं, तो आप अपनी दुनिया बदल सकते हैं।”
कैसे बचें:
अधिक सोचने से बचने के लिए आप कुछ चीजें कर सकते हैं, जैसे कि:
1* सकारात्मक रहें (stay positive): सकारात्मक रहने और नकारात्मक विचारों को अपने से दूर रखने की कोशिश करें।
2* ध्यान करें (Meditate): ध्यान आपके दिमाग को शांत करने और चिंता को कम करने में मदद कर सकता है।
3* व्यायाम करें (Daily workout): व्यायाम आपके मूड को बेहतर बनाने और तनाव को कम करने में मदद कर सकता है।
4* पर्याप्त नींद लें (take sufficient sleep): पर्याप्त नींद लेने से आपके दिमाग को ठीक से काम करने में मदद मिलेगी और आप ज्यादा सोचने से बच सकेंगे।
5* जरूरत पड़ने पर मदद लें (seek help): यदि आप ज्यादा सोचने से परेशान हैं, तो मनोवैज्ञानिक से मदद लें। वे आपको ज्यादा सोचने से बचने और अपनी चिंता को कम करने में मदद कर सकते हैं।
निष्कर्ष:
अधिक सोचना एक आम समस्या है, लेकिन यह हमारी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है। यदि आप ज्यादा सोचते हैं, तो उपरोक्त उपायों को आजमाएं। यदि आप फिर भी परेशान हैं, तो मनोवैज्ञानिक से मदद लें।
“मानसिक स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण है जितना शारीरिक स्वास्थ्य।”
सोचने से सिर में दर्द क्यों होता है?
आपने कभी सोचा है कि सोचने से सिर में दर्द क्यों होता है? इसका कारण आपके दिमाग में होने वाली कुछ रासायनिक और शारीरिक प्रक्रियाएं हैं। reason for this Headache?
जब आप सोचते हैं, तो आपके दिमाग में न्यूरॉन्स नामक कोशिकाएं सक्रिय होती हैं। ये न्यूरॉन्स एक दूसरे के साथ संवाद करने के लिए रासायनिक संदेशवाहक (neurotransmitters) का उपयोग करते हैं।
जब आप बहुत ज्यादा सोचते हैं, तो आपके दिमाग में इन न्यूरोट्रांसमीटरों का स्तर असंतुलित हो सकता है। इससे सिरदर्द हो सकता है।
इसके अलावा, जब आप सोचते हैं, तो आपके दिमाग में रक्त प्रवाह भी बढ़ जाता है (Blood flow increases)। यह रक्त प्रवाह आपके दिमाग के कुछ हिस्सों में दबाव बढ़ा सकता है, जिससे भी सिरदर्द हो सकता है।
सिरदर्द का एक और कारण मांसपेशियों में तनाव हो सकता है। जब आप सोचते हैं, तो आपकी गर्दन और कंधों की मांसपेशियां तनावग्रस्त हो सकती हैं (muscles become stressed)। यह तनाव सिरदर्द का कारण बन सकता है।
सोचने से होने वाले सिरदर्द से कैसे बचें? Any way out?
“मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करना कोई शर्म की बात नहीं है।”

सिरदर्द से बचने के लिए, आपको निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
1* पर्याप्त नींद लें (Long restful sleep): जब आप पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं, तो आपके दिमाग में रासायनिक संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे सिरदर्द हो सकता है। इसलिए, रोजाना 7-8 घंटे की नींद लेने की कोशिश करें।
2* पानी पिएं (drink lots of water): जब आपके शरीर में पानी की कमी होती है, तो आपके दिमाग में रक्त प्रवाह कम हो जाता है, जिससे सिरदर्द हो सकता है। इसलिए, हर दिन पर्याप्त पानी पीने की कोशिश करें।
3* तनाव कम करें (Be less Stressed): तनाव सिरदर्द का एक प्रमुख कारण है। इसलिए, अपने जीवन में तनाव को कम करने के तरीके खोजें। आप व्यायाम, योग, या ध्यान जैसी गतिविधियां कर सकते हैं।
4* अच्छी मुद्रा बनाए रखें (Comfortable sitting position): जब आप लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठते हैं या खड़े रहते हैं, तो आपकी गर्दन और कंधों की मांसपेशियां तनावग्रस्त हो सकती हैं, जिससे सिरदर्द हो सकता है। इसलिए, अपनी मुद्रा पर ध्यान दें और कोशिश करें कि सीधे खड़े रहें और बैठें।
यदि आपको सोचने से होने वाले सिरदर्द से अक्सर परेशानी होती है, तो डॉक्टर से बात करें। वे आपके सिरदर्द के कारण का पता लगाने में आपकी मदद कर सकते हैं और आपको उपचार के विकल्प सुझा सकते हैं।
“प्रयास के बिना कोई सफलता नहीं मिलती।”
ज्यादा सोचने से क्या बीमारी हो सकती है?
ज्यादा सोचने से क्या बीमारी हो सकती है?
ज्यादा सोचने की आदत को ओवरथिंकिंग (overthinking) कहते हैं। यह एक बहुत ही आम आदत है, लेकिन यह आपकी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है।
जब आप ज्यादा सोचते हैं, तो आपके दिमाग में नकारात्मक विचारों का चक्र चलता रहता है (Negative thinking loop)। यह चक्र आपके दिमाग को थका देता है और आपको तनाव और चिंता का अनुभव कराता है।
“प्रयास आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा और अपने सपनों को साकार करेगा।”
ज्यादा सोचने से निम्नलिखित बीमारियां हो सकती हैं:
** डिप्रेशन (depression): डिप्रेशन एक गंभीर मानसिक बीमारी है जो आपके मूड, विचारों और व्यवहार को प्रभावित करती है। डिप्रेशन के लक्षणों में शामिल हैं: उदास महसूस करना, रुचि खोना, थकान, और नींद की समस्याएं।
** एंग्जायटी (anxiety): एंग्जायटी एक सामान्य मानसिक विकार है जो अत्यधिक चिंता और भय की भावनाओं की विशेषता है। एंग्जायटी के लक्षणों में शामिल हैं: बेचैनी, घबराहट, और चिंता।
** इंसोम्निया (insomnia): इंसोम्निया एक नींद विकार है जो सोने में कठिनाई या नींद में बने रहने में कठिनाई की विशेषता है। इंसोम्निया के कारण थकान, चिंता, और अवसाद हो सकता है।
** हाई ब्लड प्रेशर (high blood pressure): हाई ब्लड प्रेशर एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपके रक्त वाहिकाओं में रक्त का दबाव बहुत अधिक होता है। हाई ब्लड प्रेशर के कारण हृदय रोग, स्ट्रोक, और गुर्दे की बीमारी हो सकती है।
“अतीत को अतीत में ही रहने दें और भविष्य के बारे में चिंता न करें। वर्तमान में जिएं और इसका आनंद लें।”
ज्यादा सोचने से निम्नलिखित शारीरिक समस्याएं भी हो सकती हैं:
** सिरदर्द (headache): सिरदर्द ज्यादा सोचने का एक बहुत ही आम लक्षण है। यह आपके दिमाग में रक्त प्रवाह बढ़ने के कारण होता है।
** मांसपेशियों में तनाव (muscle tension): जब आप सोचते हैं, तो आपकी गर्दन और कंधों की मांसपेशियां तनावग्रस्त हो सकती हैं। यह तनाव मांसपेशियों में दर्द और सिरदर्द का कारण बन सकता है।
** पाचन संबंधी समस्याएं (digestive problems): ज्यादा सोचने से पाचन संबंधी समस्याएं जैसे कि पेट दर्द, कब्ज, और दस्त हो सकते हैं। यह आपके शरीर में तनाव हार्मोन के स्तर को बढ़ाने के कारण होता है।
यदि आपको लगता है कि आप ज्यादा सोचते हैं और इससे आपको कोई शारीरिक या मानसिक समस्या हो रही है, तो डॉक्टर से बात करें। वे आपके लक्षणों का कारण जानने में आपकी मदद कर सकते हैं और आपको उपचार के विकल्प सुझा सकते हैं।
“वर्तमान में जीने का मतलब यह भी है कि आपके पास जो कुछ है उसके लिए आभारी रहना।”

ओवरथिंकिंग बंद कैसे करें?
ओवरथिंकिंग यानी जरूरत से ज्यादा सोचना, एक बहुत ही आम समस्या है। जब हम कोई फैसला लेते हैं, कोई नया काम शुरू करते हैं या किसी मुश्किल स्थिति में होते हैं, तो थोड़ा बहुत सोचना स्वाभाविक है (its normal)। लेकिन जब हम किसी चीज के बारे में बार-बार सोचते रहते हैं और उससे बाहर नहीं निकल पाते, तो यह ओवरथिंकिंग हो जाती है।
ओवरथिंकिंग हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक है। इससे तनाव, चिंता, डिप्रेशन, नींद की समस्याएं और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
“सही सोचने से समस्याएं हल होती हैं, गलत सोचने से समस्याएं बढ़ती हैं।”
अगर आप ओवरथिंकिंग से परेशान हैं, तो इन तरीकों से इसे बंद कर सकते हैं:
1* अपने विचारों को पहचानें (Observe your thoughts): सबसे पहले, आपको अपने ओवरथिंकिंग पैटर्न (Pattern) को पहचानना होगा। जब आप किसी चीज के बारे में बार-बार सोचने लगें, तो उस पर ध्यान दें और अपने विचारों को लिख लें। इससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि आप किन चीजों के बारे में ज्यादा सोचते हैं और क्यों सोचते हैं।
2* अपने विचारों को चुनौती दें (Challenge your thoughts): जब आप अपने विचारों को लिख लें, तो उन पर सवाल उठाएं। अपने आप से पूछें कि क्या आपके विचार तथ्यों पर आधारित हैं या नहीं। क्या आपके विचारों में कोई तर्क है? क्या आपके विचार आपको आगे बढ़ने में मदद कर रहे हैं या आपको पीछे खींच रहे हैं? (Thoughts pulling you back?)
3* अपने ध्यान को कहीं और लगाएं (Positively distract your mind): जब आप ओवरथिंकिंग करते हैं, तो आपका ध्यान नकारात्मक विचारों पर केंद्रित होता है। इससे बचने के लिए, अपने ध्यान को कहीं और लगाएं।
आप कोई ऐसी गतिविधि कर सकते हैं जो आपको पसंद हो, जैसे कि किताब पढ़ना, संगीत सुनना, या किसी दोस्त के साथ बात करना। (Follow your hobbies)
“सही सोचने वाला इंसान कभी हार नहीं मानता।”
** सकारात्मक सोचें (Think positively): कोशिश करें कि अपने विचारों को सकारात्मक दिशा में ले जाएं। अपने आप को याद दिलाएं कि आप एक सक्षम व्यक्ति हैं और आप किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं।
** वर्तमान क्षण में रहें (Live in the present): ओवरथिंकिंग अक्सर भविष्य के बारे में चिंता करने या अतीत को याद करने के कारण होती है। इससे बचने के लिए, वर्तमान क्षण में रहने की कोशिश करें।
अपने आस-पास के वातावरण पर ध्यान दें और अपने शरीर की संवेदनाओं को महसूस करें। Observe your surroundings and observe how you feel.
अगर आप ओवरथिंकिंग को बंद करने में सफल नहीं हो पा रहे हैं, तो किसी थेरेपिस्ट या काउंसलर से बात करें (Contact a medical professional)। वे आपको ओवरथिंकिंग से निपटने में मदद कर सकते हैं और आपको सकारात्मक सोचने के तरीके सिखा सकते हैं।
“सकारात्मक सोच आपके दिमाग को तेज करती है और आपको बेहतर निर्णय लेने में मदद करती है।
ज्यादा सोचने वाले लोगों को क्या करना चाहिए?
(दो दोस्त आपस में बात कर रहे हैं)
पहला दोस्त: यार, मैं बहुत ज्यादा सोचता हूँ। हर बात के लिए मेरे मन में तरह-तरह के विचार आते हैं और मैं उनसे बाहर नहीं निकल पाता हूँ। इस वजह से मैं बहुत तनावग्रस्त (stressed) रहता हूँ।
दूसरा दोस्त: मैं भी पहले बहुत ज्यादा सोचता था, लेकिन अब मैंने इससे काफी हद तक छुटकारा पा लिया है। मैं तुझे कुछ टिप्स देता हूँ, जो शायद तेरे काम आएँ।
पहला दोस्त: हाँ, जरूर बता।
दूसरा दोस्त: सबसे पहले तो तुझे अपने विचारों को पहचानना होगा (Observe your thoughts)। जब तू किसी चीज के बारे में बार-बार सोचने लगे, तो उस पर ध्यान दें और अपने विचारों को लिख लें। इससे तुझे यह समझने में मदद मिलेगी कि तू किन चीजों के बारे में ज्यादा सोचता है और क्यों सोचता है।
पहला दोस्त: ठीक है, मैं यह करूँगा।
दूसरा दोस्त: एक बार जब तू अपने विचारों को पहचान लेगा, तो तू उन पर सवाल उठाना शुरू कर सकता है। अपने आप से पूछें कि क्या तेरे विचार तथ्यों पर आधारित हैं या नहीं। क्या तेरे विचारों में कोई तर्क है? क्या तेरे विचार तुझे आगे बढ़ने में मदद कर रहे हैं या तुझे पीछे खींच रहे हैं?
पहला दोस्त: हाँ, मैं यह भी करूँगा।
दूसरा दोस्त: एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि तू अपना ध्यान कहीं और लगाए। जब तू ओवरथिंकिंग करता है, तो तेरा ध्यान नकारात्मक विचारों पर केंद्रित होता है। इससे बचने के लिए, अपने ध्यान को कहीं और लगा। तू कोई ऐसी गतिविधि कर सकता है जो तुझे पसंद हो, जैसे कि किताब पढ़ना, संगीत सुनना, या किसी दोस्त के साथ बात करना।
पहला दोस्त: यह एक अच्छा तरीका है। मैं इसे आजमाऊँगा।
दूसरा दोस्त: और हाँ, सकारात्मक सोचने की कोशिश करें। अपने आप को याद दिलाएं कि तू एक सक्षम व्यक्ति है और तू किसी भी चुनौती का सामना कर सकता है।
पहला दोस्त: धन्यवाद यार, तेरी सलाह बहुत काम की लगी।
दूसरा दोस्त: कोई बात नहीं। बस याद रखना कि ओवरथिंकिंग एक आदत है और किसी भी आदत को बदला जा सकता है। थोड़ी सी कोशिश और धैर्य के साथ, तू भी ओवरथिंकिंग से छुटकारा पा सकता है।
“मानसिक स्वास्थ्य उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य, लेकिन हम इसे अक्सर अनदेखा कर देते हैं।”
(दोनों दोस्तों की बातचीत यहीं खत्म हो जाती है)

अतिरिक्त टिप्स:
1* वर्तमान क्षण में रहने की कोशिश करें (Try living in the present)। ओवरथिंकिंग अक्सर भविष्य के बारे में चिंता करने या अतीत को याद करने के कारण होती है। इससे बचने के लिए, वर्तमान क्षण में रहने की कोशिश करें।
2* अपने आस-पास के वातावरण पर ध्यान दें और अपने शरीर की संवेदनाओं को महसूस करें।
3* अगर आप हर बार ओवरथिंकिंग से बचने में सफल नहीं हो पा रहे हैं, तो चिंता न करें। यह सामान्य है। बस कोशिश करते रहें। धीरे-धीरे आप ओवरथिंकिंग पर नियंत्रण करना सीख जाएंगे। Try and try again and one day you will succeed
4* अगर आपको लगता है कि ओवरथिंकिंग आपके जीवन में बहुत अधिक हस्तक्षेप कर रही है, तो किसी थेरेपिस्ट या काउंसलर से बात करें। वे आपको ओवरथिंकिंग से निपटने में मदद कर सकते हैं और आपको सकारात्मक सोचने के तरीके सिखा सकते हैं। If need be, then keep your therapist on fast dial.
“मानसिक स्वास्थ्य के लिए मदद लेना कोई कमजोरी नहीं है। यह ताकत है कि आप अपनी परेशानियों का सामना करने और उन्हें दूर करने के लिए तैयार हैं।”
मेरा दिमाग हमेशा चिंता करने के लिए कुछ क्यों ढूंढ रहा है?
(दो दोस्त आपस में बात कर रहे हैं)
पहला दोस्त: यार, मेरा दिमाग हमेशा चिंता करने के लिए कुछ ढूंढता ही रहता है। मुझे पता है कि यह अच्छा नहीं है, लेकिन मैं इससे खुद को रोक नहीं पाता। (In search of new problems)
दूसरा दोस्त: मैं तुझे समझता हूँ। चिंता करना एक सामान्य मानवीय प्रवृत्ति है। लेकिन जब यह बहुत अधिक हो जाती है, तो यह हमारी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है।
पहला दोस्त: हाँ, मैं जानता हूँ। लेकिन मैं अपने दिमाग को कैसे चुप कराऊँ?
दूसरा दोस्त: यह आसान नहीं है, लेकिन कुछ चीजें हैं जो तू कर सकता है। सबसे पहले, तुझे अपने चिंता के ट्रिगर्स की पहचान करनी होगी। कौन सी चीजें तुझे चिंता करने लगती हैं? एक बार जब तू अपने ट्रिगर्स को जान लेगा, तो तू उनसे बचने या उनसे निपटने के तरीके खोज सकता है।
पहला दोस्त: मैं नहीं जानता कि मेरे चिंता के ट्रिगर्स क्या हैं। मैं हर चीज के बारे में चिंता करता हूँ।
दूसरा दोस्त: ठीक है, तो कुछ समय के लिए अपने विचारों को लिख ले। इससे तुझे यह समझने में मदद मिलेगी कि तू किन चीजों के बारे में सबसे ज्यादा चिंता करता है।
एक बार जब तू अपने चिंता के विषयों को जान लेगा, तो तू उन पर सवाल उठाना शुरू कर सकता है। अपने आप से पूछें कि क्या तुम्हारी चिंताएं उचित हैं। क्या तुम्हारी चिंताओं को दूर करने के लिए तुम कुछ कर सकते हो? अगर नहीं, तो तुम्हारी चिंता करने से क्या फायदा?
पहला दोस्त: यह एक अच्छा तरीका है। मैं कोशिश करूँगा।
दूसरा दोस्त: एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि तू अपनी चिंताओं से दूर होने के लिए कुछ स्वस्थ तरीके खोजें। जैसे कि व्यायाम करना, योग करना, या ध्यान करना। ये गतिविधियां तुम्हारे तनाव को कम करने और तुम्हारे चिंता को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं।
पहला दोस्त: मैं पहले से ही व्यायाम करता हूँ, लेकिन मैं योग और ध्यान के बारे में ज्यादा नहीं जानता।
दूसरा दोस्त: चिंता मत कर। योग और ध्यान के बारे में बहुत सारी किताबें और ऑनलाइन संसाधन उपलब्ध हैं। तू कुछ बुनियादी बातें सीखकर शुरू कर सकता है और फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ सकते हो।
पहला दोस्त: ठीक है, मैं योग और ध्यान के बारे में कुछ और जानूँगा।
दूसरा दोस्त: और याद रखना कि तू अकेला नहीं है। बहुत से लोग चिंता से जूझते हैं। अगर तुझे लगता है कि तेरी चिंता बहुत अधिक हो गई है और तू इसे अपने आप से नहीं नियंत्रित कर पा रहा है, तो किसी डॉक्टर या थेरेपिस्ट से बात करें। वे तुझे चिंता से निपटने में मदद कर सकते हैं और तुझे सकारात्मक सोचने के तरीके सिखा सकते हैं।
(दोनों दोस्तों की बातचीत यहीं खत्म हो जाती है)
“प्रयास सफलता का मूलमंत्र है।”
Story :
शीर्षक: मन की चिंता छोड़ो, जीवन को जी लो
एक प्रसिद्ध साधु अपने शिष्य के साथ एक गाँव में घूम रहे थे। शिष्य बहुत ज्यादा सोचने वाला था और हमेशा तनावग्रस्त रहता था। एक बार उसने साधु से पूछा, “गुरुजी, मैं बहुत ज्यादा सोचता हूँ। यह मेरी चिंता और तनाव का कारण है। मैं इससे कैसे छुटकारा पा सकता हूँ?”
साधु ने शिष्य को गाँव के एक वृद्ध किसान के पास ले गए। किसान अपने खेत में काम कर रहा था। साधु ने किसान से पूछा, “बाबा, आप इतने बड़े हो, लेकिन फिर भी आप इतने स्वस्थ और खुश हैं। इसका क्या राज है?”
किसान ने मुस्कुराते हुए कहा, “बेटा, मैंने जिंदगी में कभी चिंता नहीं की। मैं हमेशा वर्तमान में जीता हूँ। मैं सोचता हूँ कि जो है, सो है। उसको बदलने से कुछ नहीं होगा। इसलिए मैं चिंता करने के बजाय अपने काम पर ध्यान देता हूँ।”
साधु ने शिष्य को देखा और कहा, “देखा न, किसान कितना सहज है। वह जानता है कि चिंता करने से कुछ नहीं होगा। इसलिए वह वर्तमान में जीता है और खुश रहता है।”
साधु और शिष्य आगे बढ़ गए। रास्ते में उन्हें एक व्यापारी मिला। व्यापारी बहुत तनावग्रस्त दिखाई दे रहा था। साधु ने व्यापारी से पूछा, “बेटा, तुम इतने तनावग्रस्त क्यों हो?”
व्यापारी ने कहा, “गुरुजी, मैं अपने व्यापार की चिंता कर रहा हूँ। मैं चाहता हूँ कि मेरा व्यापार बहुत अच्छा चले, लेकिन मुझे डर लगता है कि अगर मेरा व्यापार नहीं चला तो मैं क्या करूँगा।”
साधु ने व्यापारी को देखा और कहा, “बेटा, तुम भविष्य की चिंता कर रहे हो। लेकिन भविष्य में क्या होगा, यह कोई नहीं जानता। इसलिए भविष्य की चिंता करना बेकार है। तुम्हें अपने वर्तमान पर ध्यान देना चाहिए। तुम्हें अपने व्यापार को ईमानदारी से और मेहनत से करना चाहिए। बाकी भगवान पर छोड़ दो।”
साधु और शिष्य गाँव के बाहर एक नदी के किनारे पहुँचे। नदी के किनारे एक बच्चा खेल रहा था। बच्चा बहुत खुश लग रहा था। साधु ने बच्चे से पूछा, “बेटा, तुम इतने खुश क्यों हो?”
बच्चे ने कहा, “गुरुजी, मैं खुश हूँ क्योंकि मैं वर्तमान में जी रहा हूँ। मैं भविष्य की चिंता नहीं कर रहा हूँ और अतीत के बारे में नहीं सोच रहा हूँ। मैं बस इस पल को जी रहा हूँ और इस पल में खुशी खोज रहा हूँ।”
साधु ने शिष्य को देखा और कहा, “देखा न, बच्चा कितना सहज है। वह जानता है कि वर्तमान में जीना ही खुशी का राज है। इसलिए वह हमेशा खुश रहता है।”
साधु ने शिष्य को समझाया कि जरूरत से ज्यादा सोचने से चिंता और तनाव होता है। चिंता और तनाव से बीमारियाँ होती हैं। इसलिए हमें जरूरत से ज्यादा सोचना बंद करना चाहिए। हमें वर्तमान में जीना चाहिए और भगवान पर भरोसा करना चाहिए।
यहाँ कुछ टिप्स हैं जो आपको ओवरथिंकिंग छोड़ने में मदद कर सकते हैं:
** अपने विचारों को पहचानें और उन्हें चुनौती दें। जब आप खुद को किसी चीज के बारे में बार-बार सोचते हुए देखें, तो रुकें और अपने विचारों पर ध्यान दें।
अपने आप से पूछें कि क्या आपके विचार तथ्यों पर आधारित हैं या नहीं। क्या आपके विचारों में कोई तर्क है? क्या आपके विचार आपको आगे बढ़ने में मदद कर रहे हैं या आपको पीछे खींच रहे हैं?
1* अपना ध्यान कहीं और लगाएं। जब आप ओवरथिंकिंग कर रहे हों, तो अपना ध्यान किसी और चीज पर लगाने की कोशिश करें। आप कोई किताब पढ़ सकते हैं, संगीत सुन सकते हैं, या किसी दोस्त के साथ बात कर सकते हैं।
2* वर्तमान में जिएं। जब आप वर्तमान में जीते हैं, तो आप चिंता और तनाव से मुक्त रहते हैं। वर्तमान में जीने के लिए, अपने आस-पास के वातावरण पर ध्यान दें और अपनी शारीरिक संवेदनाओं को महसूस करें।
3* मदद लें। अगर आप ओवरथिंकिंग को अपने दम पर रोकने में असमर्थ हैं, तो किसी चिकित्सक या परामर्शदाता से बात करें। वे आपको ओवरथिंकिंग से निपटने और सकारात्मक सोचने के तरीके सिखा सकते हैं।
“वर्तमान में जिएं और आनंद लें। अतीत के बारे में चिंता न करें और भविष्य के बारे में सोचकर परेशान न हों।”

Real life facts on Overthinking .
यहाँ कुछ वास्तविक जीवन के तथ्य हैं कि क्यों हमें ओवरथिंकिंग छोड़ देनी चाहिए और यह हमारे जीवन के लिए बुरा क्यों है:
1* ओवरथिंकिंग से चिंता और तनाव होता है, जिससे नींद की समस्या, पाचन संबंधी समस्याएं, हृदय रोग, और उच्च रक्तचाप जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
2* ओवरथिंकिंग से हम अपनी रचनात्मकता और समस्या-समाधान क्षमता को खो देते हैं।
3* ओवरथिंकिंग से हम अवसरों को चूक जाते हैं और निर्णय लेने में कठिनाई का सामना करते हैं।
4* ओवरथिंकिंग से हम अपने वर्तमान को नहीं जी पाते हैं और खुशी महसूस नहीं कर पाते हैं।
यहाँ कुछ प्रेरक तथ्य (Life Facts)हैं जो आपको ओवरथिंकिंग छोड़ने के लिए प्रेरित करेंगे:
** आप अपने दिमाग को नियंत्रित कर सकते हैं। आपके पास अपने विचारों को चुनने की शक्ति है।
** आप वर्तमान में जीना सीख सकते हैं। जब आप वर्तमान में जीते हैं, तो आप चिंता और तनाव से मुक्त रहते हैं।
** आप अपनी चिंताओं को दूर करना सीख सकते हैं। चिंता करना समस्या का समाधान नहीं है।
** आप अपनी रचनात्मकता और समस्या-समाधान क्षमता को बढ़ा सकते हैं। जब आप ओवरथिंकिंग बंद करते हैं, तो आपका दिमाग अधिक स्पष्ट रूप से सोच पाता है।
** आप अपने अवसरों को भुना सकते हैं और निर्णय लेने में बेहतर हो सकते हैं। जब आप वर्तमान में जीते हैं और चिंता करना बंद करते हैं, तो आप अधिक आत्मविश्वास महसूस करते हैं और निर्णय लेने में बेहतर होते हैं।
** आप खुशी महसूस कर सकते हैं। जब आप ओवरथिंकिंग बंद करते हैं और वर्तमान में जीते हैं, तो आप जीवन की छोटी-छोटी बातों में खुशी पा सकते हैं।
अगर आप ओवरथिंकिंग से जूझ रहे हैं, तो याद रखें कि आप अकेले नहीं हैं। बहुत से लोग ओवरथिंकिंग करते हैं। लेकिन अच्छी खबर यह है कि आप इसे रोक सकते हैं। बस थोड़ा अभ्यास चाहिए।
“वर्तमान में जीने का मतलब यह भी है कि आपके पास जो कुछ है उसके लिए आभारी रहना।”